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जबरदस्ती घुसने की कोशिश पर 5 साल की सजा या 37.5 लाख रुपए जुर्माने का कानून बनाया; लग रहा भेदभाव का आरोप



ऑस्ट्रेलिया सरकार कोविड को लेकर बनाए अपने ही एक कानून को लेकर घिर गई है। चारों तरफ सरकार का विरोध हो रहा है। दरअसल, भारत में कोरोना की सुनामी के बाद दूसरे देशों की तरह ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी सीमाएं भारत के लिए बंद कर दीं। 15 मई तक भारत आने-जाने वा

ली फ्लाइट्स पर बैन लगाया।

यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन 30 अप्रैल को सरकार ने 2015 के बायो-सिक्योरिटी एक्ट के तहत कानून बना दिया कि अगर भारत में फिलहाल रह रहे किसी भी ऑस्ट्रलियाई नागरिक या रेजिडेंट ने ऑस्ट्रेलिया में दूसरे देश के रास्ते घुसने की कोशिश की, तो उसे 5 साल की सजा या 66,000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर (करीब 37.5 लाख रुपए) का जुर्माना भरना होगा। अब ऑस्ट्रेलिया मेडिकल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन को चिट्ठी लिखकर इस कानून पर ऐतराज जताया है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. उमर खुर्शीद के मुताबिक, भारत में फंसे लगभग 9 हजार ऑस्ट्रेलियाई बेहद खतरे में हैं। उन पर संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में सरकार को उन्हें किसी भी तरह वापस लाकर उनकी जान बचानी चाहिए। विपक्ष के नेता एंथनी एलबीसी ने तो मॉरिसन सरकार पर नस्लभेद का आरोप लगा दिया है। उनके मुताबिक, भारत में फंसे ज्यादातर ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भारतीय मूल के हैं और एक साल से वापस आने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पूरे विश्व में अभी 37 हजार से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई फंसे हैं।

वहीं, प्रधानमंत्री मॉरिसन ने कहा है कि यह कदम मेडिकल एक्सपर्ट्स की सलाह पर उठाया गया है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के चीफ मेडिकल ऑफिसर पॉल कैली ने खुद इस दावे की पोल खोल दी। उनके मुताबिक, उन्होंने सरकार को इस तरह की कोई सलाह नहीं दी कि वह भारत से आने वाले ऑस्ट्रेलियन्स को जेल में डाले। ऑस्ट्रेलिया की सरकार के इस फैसले को लेकर भारतीय समुदाय में भी बेहद गुस्सा है। इंडियन ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटजिक अलायंस के अध्यक्ष डॉ. जगविंदर सिंह विर्क ने सरकार के इस फैसले को तबाह करने वाला बताया है।

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